कृषि विभाग द्वारा सोया किसानो के लिये साप्ताहिक सलाह 👉सोयाबीन फसल की सतत निगरानी रोग एवं कीट दिखाई देते ही नियंत्रण के उपाय अपनाएं।।
कृषि विभाग द्वारा सोया कृषको के लिये साप्ताहिक सलाह*
सोयाबीन फसल की सतत निगरानी करें, रोग एवं कीट दिखाई देते ही नियंत्रण के उपाय अपनाएं।।
ब्रेकिंग न्यूज़ कोबरा।
मुकेश गौड़
शिवपुरी, 26 अगस्त 2026/ कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्थानीय अमला किसानों से लगातार संपर्क में रहे। विभाग द्वारा फसलों को लेकर जरूरी परामर्श दिए जाएं।
उपसंचालक कृषि श्री मुनेश कुमार शाक्य द्वारा कृषको को सलाह दी है कि सोयाबीन फसल की सतत निगरानी करें, रोग एवं कीट दिखाई देते ही नियंत्रण के उपाय अपनाएं। जिले में खरीफ मौसम के दौरान सोयाबीन फसल वर्तमान में महत्वपूर्ण वृद्धि अवस्था में है। इस समय फसल में रोग एवं कीटों के प्रकोप की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए कृषकों को अपने खेतों का नियमित निरीक्षण करने की सलाह दी जा रही है। राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर द्वारा जारी साप्ताहिक सलाह के अनुसार रोग एवं कीटों की समय पर पहचान कर प्रारंभिक अवस्था में नियंत्रण करने से फसल को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।
वर्तमान परिस्थितियों में सोयाबीन फसल में एन्थ्रेक्नोज रोग, राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट एवं पीला मोजेक रोग के साथ-साथ तंबाकू की इल्ली, सेमीलूपर, चने की इल्ली, बिहार हेरी कैटरपिलर, गर्डल बीटल, तना मक्खी एवं सफेद मक्खी जैसे कीटों पर विशेष निगरानी रखने की आवश्यकता है। एन्थ्रेक्नोज रोग के लक्षण दिखाई देने पर कृषक अनुशंसित फफूंदनाशक टेबुकोनाज़ोल 10% + सल्फर 65% डब्ल्यूजी अथवा कार्बेन्डाज़िम 12% + मैंकोज़ेब 63% डब्ल्यूपी का अनुशंसित मात्रा में छिड़काव कर सकते हैं। इसी प्रकार राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट के नियंत्रण के लिए पाइराक्लोस्ट्रोबिन अथवा पाइराक्लोस्ट्रोबिन + इपोक्सीकोनाज़ोल का प्रयोग कृषि विज्ञान केन्द्र अथवा कृषि विभाग की तकनीकी सलाह के अनुसार किया जा सकता है।
सोयाबीन में पीला मोजेक रोग दिखाई देने पर संक्रमित पौधों को प्रारंभिक अवस्था में खेत से निकालकर नष्ट करें। रोग के प्रसार को रोकने के लिए इसके वाहक सफेद मक्खी एवं अन्य रस चूसक कीटों का नियंत्रण आवश्यक है। इसके लिए थायमेथोक्सम + लैम्ब्डा-साइहैलोथ्रिन, बीटा-साइफ्लूथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड अथवा एसिटामिप्रिड + बाइफेंथ्रिन जैसे अनुशंसित कीटनाशकों का आवश्यकता अनुसार उपयोग किया जा सकता है।
पत्ती खाने वाली इल्लियों, जैसे तंबाकू की इल्ली, सेमीलूपर एवं चने की इल्ली के प्रकोप की स्थिति में कृषक फसल का नियमित निरीक्षण करें तथा प्रकोप पाए जाने पर क्लोरांट्रानिलीप्रोल, इंडोक्साकार्ब, इमामेक्टिन बेंजोएट अथवा स्पिनेटोरम जैसे अनुशंसित कीटनाशकों का निर्धारित मात्रा में प्रयोग करें। गर्डल बीटल से प्रभावित पौधों एवं कटे हुए पौधों के भागों को एकत्र कर नष्ट करना भी आवश्यक है, जिससे कीट का आगे प्रसार रोका जा सके।
उपसंचालक कृषि द्वारा जिले के सोयाबीन उत्पादक कृषकों से अपील की गई है कि वे बिना आवश्यकता किसी भी कृषि रसायन का छिड़काव न करें तथा रोग अथवा कीट की सही पहचान के उपरांत ही अनुशंसित दवा का प्रयोग करें। कीटनाशक एवं फफूंदनाशकों का उपयोग अनुशंसित मात्रा कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक अथवा कृषि विभाग के तकनीकी अमले के मार्गदर्शन अनुसार ही किया जाए।
कृषक सोयाबीन फसल में रोग एवं कीट संबंधी किसी भी समस्या के लिए अपने क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अथवा विकासखंड कृषि कार्यालय से संपर्क कर आवश्यक तकनीकी सलाह प्राप्त कर सकते हैं।
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